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चिकित्सकीय संकेत

जन्मकुण्डली में चिकित्सकीय संकेत शरीर के विभिन्न अंगों और संभावित रोगों के बारे में सूक्ष्म जानकारी प्रदान करते हैं। प्रत्येक ग्रह का संबंध शरीर के किसी विशेष अंग से होता है, जैसे सूर्य हृदय और आँखों से, चंद्रमा मन और रक्त से, मंगल रक्त और मांसपेशियों से, बुध तंत्रिका तंत्र से, गुरु यकृत से और शनि हड्डियों से संबंधित होता है। षष्ठ भाव रोगों का, अष्टम भाव दीर्घकालिक समस्याओं का और द्वादश भाव अस्पताल तथा खर्च का संकेत देता है। यदि कोई ग्रह अशुभ स्थिति में हो या पाप ग्रहों से प्रभावित हो, तो उससे संबंधित अंग में समस्या उत्पन्न हो सकती है। कुंडली के माध्यम से संभावित रोगों का पूर्व संकेत प्राप्त किया जा सकता है, जिससे समय रहते सावधानी बरती जा सके। दशा और गोचर के आधार पर रोगों के प्रकट होने का समय भी ज्ञात किया जाता है। इस प्रकार ज्योतिष चिकित्सा क्षेत्र में एक सहायक संकेतक के रूप में कार्य करता है।