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मंगल दोष निवारण पूजा

वैदिक ज्योतिष में मंगल दोष, जिसे मांगलिक दोष भी कहा जाता है, तब बनता है जब मंगल ग्रह जन्मकुंडली के लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित होता है, जिससे विशेष रूप से वैवाहिक जीवन में तनाव, मतभेद या विलंब की संभावना मानी जाती है। इस दोष के निवारण के लिए मंगल दोष निवारण पूजा एक प्रभावी और पारंपरिक उपाय माना जाता है, जिसका उद्देश्य मंगल की उग्रता को शांत करना और उसके सकारात्मक गुणों को बढ़ाना है। इस पूजा में भगवान शिव, भगवान हनुमान और मंगल देव की विशेष आराधना की जाती है, क्योंकि ये मंगल के प्रभाव को संतुलित करने वाले माने जाते हैं। पूजा के दौरान रुद्राभिषेक, हनुमान चालीसा का पाठ, मंगल बीज मंत्र—“ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः”—का जप, हवन और विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। कुछ परिस्थितियों में “कुंभ विवाह”, “वट विवाह” या “विष्णु विवाह” जैसे पारंपरिक उपाय भी किए जाते हैं, जिससे दोष का प्रभाव कम हो सके। इसके अतिरिक्त मंगलवार का व्रत रखना, लाल वस्त्र, मसूर दाल या तांबे का दान करना भी लाभकारी माना जाता है। यह पूजा केवल दोष निवारण तक सीमित नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर धैर्य, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा विकसित करने में भी सहायक होती है। हालांकि यह ध्यान रखना आवश्यक है कि इसका प्रभाव व्यक्ति की संपूर्ण कुंडली, ग्रहों की स्थिति और उसके कर्मों पर भी निर्भर करता है। इस प्रकार मंगल दोष निवारण पूजा व्यक्ति को वैवाहिक जीवन में सामंजस्य, शांति और स्थिरता प्राप्त करने तथा जीवन की बाधाओं को दूर करने में एक सहायक आध्यात्मिक उपाय के रूप में देखी जाती है।