संपत्ति
संपत्ति का ज्योतिषीय विश्लेषण चतुर्थ भाव, उसके स्वामी ग्रह और संबंधित कारक ग्रहों के आधार पर किया जाता है। चतुर्थ भाव भूमि, घर, वाहन और स्थायी संपत्ति का प्रतिनिधित्व करता है। मंगल भूमि और निर्माण का कारक है, जबकि शुक्र भौतिक सुख-सुविधाओं का। यदि चतुर्थ भाव और उसका स्वामी शुभ स्थिति में हो, तो व्यक्ति को घर और संपत्ति का सुख प्राप्त होता है। शनि का प्रभाव संपत्ति में देरी या संघर्ष ला सकता है, जबकि राहु विदेशी भूमि या असामान्य संपत्ति का संकेत देता है। अष्टम भाव विरासत में मिलने वाली संपत्ति को दर्शाता है। दशा और गोचर के अनुसार संपत्ति खरीदने, बेचने या निर्माण का समय निर्धारित होता है। कुंडली यह भी बताती है कि संपत्ति स्वयं के प्रयास से प्राप्त होगी या पारिवारिक विरासत से। इस प्रकार ज्योतिष संपत्ति संबंधी निर्णयों के लिए उचित समय और दिशा प्रदान करता है।
