स्वास्थ्य

स्वास्थ्य का ज्योतिषीय विश्लेषण जीवन की गुणवत्ता को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसमें लग्न (प्रथम भाव), षष्ठ भाव, अष्टम भाव और द्वादश भाव की विशेष भूमिका होती है। लग्न शरीर की संरचना, प्रकृति और मूल स्वास्थ्य का द्योतक होता है। षष्ठ भाव रोग, शत्रु और शारीरिक कष्टों को दर्शाता है, जबकि अष्टम भाव दीर्घकालिक रोग, दुर्घटनाएँ और जीवन की अनिश्चितताओं का प्रतीक है। द्वादश भाव अस्पताल, खर्च और मानसिक तनाव से जुड़ा होता है। सूर्य जीवन शक्ति और हृदय का प्रतिनिधित्व करता है, चंद्रमा मन और मानसिक संतुलन का, मंगल रक्त और ऊर्जा का, तथा शनि दीर्घकालिक रोगों और कमजोरी का संकेत देता है। यदि ये ग्रह अशुभ प्रभाव में हों या पाप ग्रहों की दृष्टि में हों, तो स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। राहु-केतु अचानक या अज्ञात रोगों का संकेत देते हैं। महादशा और गोचर के अनुसार स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव का समय निर्धारित होता है। कुंडली यह भी बताती है कि व्यक्ति को किस प्रकार की सावधानी रखनी चाहिए और किस जीवनशैली से वह स्वस्थ रह सकता है। इस प्रकार ज्योतिष न केवल रोगों का संकेत देता है, बल्कि स्वास्थ्य संरक्षण के मार्ग भी सुझाता है।