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रोग विश्लेषण

रोगों का गहन विश्लेषण ज्योतिष में षष्ठ, अष्टम और द्वादश भाव के माध्यम से किया जाता है। षष्ठ भाव रोग और शत्रुओं का, अष्टम भाव दीर्घकालिक और जटिल रोगों का, तथा द्वादश भाव अस्पताल और खर्च का प्रतिनिधित्व करता है। शनि पुराने और लंबे समय तक चलने वाले रोगों का संकेत देता है, मंगल चोट, दुर्घटना और रक्त संबंधी रोगों का, जबकि राहु और केतु अज्ञात या रहस्यमय रोगों का संकेत देते हैं। यदि ये ग्रह अशुभ स्थिति में हों, तो रोगों की संभावना बढ़ जाती है। कुंडली यह भी दर्शाती है कि रोग अस्थायी होगा या दीर्घकालिक। दशा और गोचर के अनुसार रोग के प्रकट होने और समाप्त होने का समय ज्ञात किया जा सकता है। इस प्रकार ज्योतिष रोगों के प्रकार और समय का संकेत देकर व्यक्ति को सावधान रहने की प्रेरणा देता है।