धन
धन का ज्योतिषीय विश्लेषण व्यक्ति की आर्थिक स्थिति, आय के स्रोत और वित्तीय स्थिरता को समझने में सहायक होता है। द्वितीय भाव संचित धन और परिवार से प्राप्त संपत्ति का प्रतिनिधित्व करता है, एकादश भाव आय, लाभ और इच्छाओं की पूर्ति का, जबकि नवम भाव भाग्य और समृद्धि का संकेत देता है। बृहस्पति (गुरु) धन और विस्तार का प्रमुख कारक ग्रह है, जबकि शुक्र विलासिता, सुख-सुविधाओं और भौतिक समृद्धि को दर्शाता है। यदि ये ग्रह शुभ स्थिति में हों और धन भावों से संबंध बनाते हों, तो व्यक्ति को आर्थिक सफलता प्राप्त होती है। धन योग, लक्ष्मी योग और राजयोग जैसे विशेष योग धन वृद्धि के संकेत देते हैं। शनि धीरे-धीरे लेकिन स्थायी धन प्रदान करता है, जबकि राहु अचानक लाभ या जोखिम भरे अवसरों का संकेत देता है। दशा और गोचर के माध्यम से आय में वृद्धि या कमी का समय ज्ञात किया जाता है। कुंडली यह भी बताती है कि व्यक्ति किस क्षेत्र में धन अर्जित करेगा और उसकी आर्थिक स्थिति कितनी स्थिर रहेगी। इस प्रकार ज्योतिष व्यक्ति के धन-संबंधी जीवन की दिशा और संभावनाओं को स्पष्ट करता है।
