मानव जीवन में ज्योतिष और 9 अंक का महत्त्व

आज संसार में हर मानव की यह ईच्छा होती है कि वह धन, पद, मानसम्मान से युक्त हो| इसी तरह मनुष्य का जीवनचक्र मृत्यु तक 9 भागों में तीन-तीन बिन्दुओं के योग से बना हुआ है, जो इस प्रकार हैं- माता-पिता-भ्रूण, संसार-स्वांस-जीवन, गुरु-ज्ञान-विद्यार्थी, सदगुरु-ब्रह्मज्ञान-शिष्य, परिवार-जीवनसाथी-मनुष्य, कम्पनी-धन-मनुष्य, मालिक-पद/प्रतिष्ठा-मनुष्य, मित्र-प्यार-मनुष्य, मनुष्य-लकड़ी-अग्नि|यदि इन नौ भागों में से एक भाग न हो या प्रत्येक भाग के तीन बिंदु त्रिकोण रूप में सभी कोण समान न हों तो प्रत्येक मनुष्य अपने जीवन में कहीं न कहीं कमी या अधूरापन महसूस करता है और साथ ही फिर उदासीन रहता है तब वह ज्योतिश्चार्य के संपर्क में जाता है| यदि मनुष्य प्रारम्भ से ही अपने माँ-बाप, गुरु और सदगुरु के दिशानिर्देशानुसार जीवन रूपी सीढ़ी पर एक निश्चित गति से चलने की कोशिश करे तो वह उदासीनता के बजाय शान्ति और आंनंद का अनुभव कर अपने जीवन में आने वाली परेशानियों का सामना आसानी से कर सकता है| अत: संसार का प्रत्येक मनुष्य जन्म से मृत्यु के 9 भागों के प्रत्येक भाग को यदि उस त्रिकोण की भांती समझे कि जिसकी तीनों रेखाएं तथा तीनों कोण की माप बराबर हो| यदि हम इस त्रिकोण की तरह ही “जीवन जीने की कला” को समयस्थित गुरु के दिशानिर्देशानुसार परिवर्तित करने की कोशिश करें तो निश्चित ही विपरीत परिस्थियों के होते हुए भी संसार का प्रत्येक मानव उस परम शान्ति का अनुभव कर इस मनुष्य जीवन के प्रत्येक भाग का आनंद ले सकता है|

प्रत्येक मानव 9 महिने तक माँ के गर्भ में रहने के बाद संसार में जन्म लेता   है| मानव शरीर में नौ द्वार होते   हैं, जो इस प्रकार हैं- दो चक्षु   द्वार, दो नसिका द्वारा, दो श्रोत द्वार, मुख, वायु व उपस्थ द्वार   क्योंकि साधना के पथ पर चलने के लिए शरीर रूपी साधन की आवश्यकता होती है, इन सभी द्वारों का मानव जीवन में बहुत   महत्तपूर्ण स्थान है| इसी   प्रकार प्राचीन शास्त्रों में भक्ति के भी 9 प्रकार बताये गये हैं, जिसे नवधा भक्ति कहते हैं| काव्य के नौ रस होते हैं जो क्रमशः शृंगार, करुण, हास्य, रौद्र, वीर, भयानक, वीभत्स, अद्भुत एवं शांत   के रूप में जाने जाते हैं| श्री भगवान राम का जन्म भी नवमी के दिन हुआ था| इस प्रकार 9 अंक का मानव जीवन में बहुत महत्त्व रखता है| हिन्दू धर्म के आधार पर 9 माताओं की पूजा होती है इसी कारण 9 दिन के नवरात्री के व्रत किये जाते हैं| हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत वैवाहिक अधिकारों की बहाली भी है|

 अब बात आती है ज्योतिष की, ज्योतिष में भी 9 के अंक का बहुत महत्त्व है| ज्योतिष के अनुसार कलयुग की वर्षों की कुल   अवधि 4,32,000, द्वापर   की 8,64,000,   त्रेता की 12,96,000 और   सतयुग की 17,28,000   वर्षों की अवधि मानी गयी है, चारों युगों की कुल वर्षावधि 43,20,000 है, प्रत्येक वर्ष की अवधि तथा वर्षावधि के अंकों का योग करें  तो 9 का अंक ही आता है| एक दिन-रात में 1440 मिनट होते हैं यदि सेकेंडों में हिसाब लगाएं   तो 86400 होते   हैं इस प्रकार मिनटों और सेकेंडों का योग भी 9 ही आता है| हमारी जन्म कुंडली में कुल 12 भाव होते हैं एक भाव 30 डिग्री का होता है, इस प्रकार पूरी कुंडली के सभी भावों का मान 360 डिग्री होता है इनका योग भी 9 होता है| ग्रहों की संख्या कुल 9 होती है| कुल 27 नक्षत्र होते हैं, जिन दो अंकों का योग भी 9 होता है| एक नक्षत्र में 4 चरण होते हैं तो कुल 27 नक्षत्रों में 108 चरण हो गए तो कुल योग 9 हो गया|

रुद्राक्ष की माला में 108 मनके होते हैं, मंत्रों का जाप 108 बार किया जाता है तो इस प्रकार संख्याओं का कुल योग 9 हुआ| पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी, सूर्य के व्यास के 108 गुना है। इसी प्रकार पृथ्वी और चंद्रमा के   बीच की दूरी भी चंद्रमा के व्यास का 108 गुना है| समुद्र मंथन के समय जब क्षीर सागर पर मंदार पर्वत पर बंधे   वासुकि नाग को देवता और असुरों ने अपनी-अपनी ओर खींचा था तब उसमें 54 देव और 54 राक्षस थे, कुल मिलाकर 108 लोग ही शामिल थे। कहा जाता है कि मनुष्य में कुल 108 भावनाएं होती हैं जिसमें से 36 भावनाओं का सम्बन्ध हमारे अतीत से, 36 का सम्बन्ध वर्तमान से और 36 का सम्बन्ध भविष्य से होता है। 108 डिग्री फ़ारेनहाइट शरीर का आंतरिक तापमान

होता है इससे अधिक गर्म होने के कारण मानव अंग विफल हो सकते हैं। हृदय चक्र से 108 नाड़ियाँ संचालित होती है | इनमें सबसे महत्वपूर्ण सुसुम्ना नाडी है | गंगा नदी जिसे हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है, वह 12 डिग्री के देशांतर और 9 डिग्री के अक्षांश पर फैली हुई है। अगर इन दोनों अंकों को गुना किया जाए तो 108 अंक मिलता है। भगवत गीता में 18 अध्याय, महाभारत में 18 पर्व, पुराणों की संख्या भी 18 ही होती है तो भी योग 9 ही बनता है|

संविधान के तहत हर बच्चे के बालिग होने की उम्र 18 साल तय की गयी थी, इसका योग भी 9 बनता है| 14 सितम्बर सन् 1949 के दिन भारतीय संघ की राजभाषा के रूप में हिन्दी को स्वीकार किया गया;जो  भारतीय संविधान में अनुच्छेद 343 से 351 तक कुल 9 अनुच्छेदों में समाहित हैं| मुहावरों में भी कहा जाता है “न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगी”|    कहावतों   में भी कहा जाता है कि “नहले पर दहला”  इस   प्रकार 9 के अंक का मानव जीवन में बहुत   महत्व है|

अन्त्वोगत्वा हम यह कह सकते हैं कि ज्योतिष का   मानव जीवन चक्र से प्रगाढ़ सम्बन्ध है और प्रत्येक मनुष्य को विद्वान ज्योतिषी की  सलाह या दिशानिर्देशानुसार ही अपने जीवन के सभी शुभ कार्यों को करना चाहिए| ज्योतिष के सिद्धान्तों को मानना या न मानना   यह आप पर निर्भर है| इस  विषय में मतान्तर हो सकते हैं पर दोस्तो उपरोक्त विषयात्मक ज्ञान आप सब लोगों को भी ज्ञात ही होगा, मैं   अपने अनुभव के आधार पर यह सुझाव/सलाह देना चाहता हूँ की मानव जीवन में ज्योतिषी से   अधिक ज्योतिष का महत्त्वपूर्ण स्थान है, इसलिए मेरा मानना यह है कि प्रत्येक मनुष्य को ज्योतिष का ज्ञान पूरा नहीं भी हो तो, थोड़ा   बहुत जानकारी तो अवश्य होनी ही चाहिए|

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